વરસાદ પછીનો ઉઘાડ

Archive for ડિસેમ્બર 2011

खरोच भी किसी मौसम की उम्रभर ना लगे
दुआ करो के मेरी खुश्बू को नज़र ना लगे
ना कहेने को भी कोइ पत्ता है, न डाली, न छाँव
किसी भी और से देखो तो वो शजर ना लगे
तू होती हैं तो दिवारें भी मुश्कूराती हैं
तू घर में ना हो तो सचमुच में घर ये घर ना लगे
मज़ा वो क्या के तुजे हो खबर के इश्क हैं ये
मज़ा तो तब हैं की इस बात की खबर ना लगे
खुदा कसम ये तेरी आशिकी भी चीज़ हैं क्या ?
के तुम से मिल के जब आते ‘जिगर’, ‘जिगर’ ना लगे
-जिगर जोशी

खरोच भी किसी मौसम की उम्रभर ना लगे
दुआ करो के मेरे प्यार को नज़र ना लगे
पहेले ये शे’र कुछ इस तरह से था । फिर मेरे अज़िज़ दोस्त गौरांग ठाकर ने एक सुज़ाव दिया और फिर ये शे’र कुछ इस तरह से आप के सामने पेश किया | शुक्रिया गौरांग भाइ

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